हिंदी दोस्ती शायरी best dosti shayari

हिंदी दोस्ती शायरी best dosti shayari
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दोस्ती . . . मनुष्य को ईश्वर के दिए हुए वरदानो में से एक है जिसके बिना वो अपने जीवन की कल्पना नहीं करता !
दोस्ती की दुनिया में लाखो परिभाषाये है परन्तु दो स्तरों के मिलान को दोस्ती कहा जाता है फिर वो चाहे कोई भी स्तर क्यों न हो – जैसे कि दो लोगो के विचारो का स्तर अगर एक है तो फिर वो दोस्ती है !

अगर किसी इंसान को दुनिया की सारी दौलत दे दी जाये और उससे उसके दोस्त छीन लिए जाये तो वो कभी भी उस दौलत के साथ जीना नहीं चाहेगा !

कुछ ऐसी ही है दोस्ती की दास्ताँ और इस दास्ताँ को बयाँ करने का शायरी एक बहुत ही अच्छा माधयम है, इसलिए “Shayaribazaar – हिंदी दोस्ती शायरी best dosti shayari” पर पढ़े और शेयर करे दोस्ती को बयां करने के लिए शायरियां. . . !!

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मरने के बाद किसी को कौन याद रखता है
कांटों का गुलशन सदा कौन आबाद रखता है
मेरे शेर भले हो तारीफ के काबिल मगर
तेरा किया हर सितम भी हक रखता है

माना फूलों को छुआ तो वो नश्तर बन गए
महलों को छुआ तो वो खंडहर बन गए
उसके बावजूद दीवाना के शेर जिस दिल में पढ़े
वो दिल मयकदे से बदलकर मंदिर बन गए

यूं तो मर गए हैं अरमान इक एहसास बाकी है
डूब गए गम के सागर में फिर भी प्यास बाकी है
गर हकीकत में हम मर भी गए तो कुछ अजीज कहेंगे
अपने शेरों में आज भी जिंदा दीवाना सुभाष बाकी है

गर तेरे इंतजार में मर भी गया दीवाना
तब भी मेरी रूह राहों में भटकती रहेगी
बेचैनी बेकसी की दास्ता फिर भी
बनके शायरी अक्सर किताबों में छपती रहेगी

उसकी खुशी के लिए दिल चाहे मौत अपनालू
मगर मरने से पहले उन्हें इतना तो समझालु
मर के भी जिंदा रहूंगा मैं अपने लिखे शेरों में
बाद में कहेंगे स्वर्गवासी अब तो दीवाना कहालू

लूटा है हमें खुद हमारी ही म्हरवानो ने
पूजा समझा प्यार हम नादान दीवानों ने
एक तुम ही थे जो ना पढ़ सके शेय मेरे को
यूं तो पढे है शेर जाने कितनी जुबानो ने

उल्फत हुई हमें गमों से इतनी, हर खुशी से दामन बचाने लगे
ठोकरें खा खा कर उनकी, यारो हम शेर पर शेर बनाने लगे

अश्क बहाए हमने तेरी चाहत में
गम अपनाएं हमने तेरी चाहत में
न उतरता था जेहन में अल्फाज एक भी
शेर बनाए हमने तेरी चाहत में

दस्तूर ए वफा निभाना छोड़ दूं
बताओ कैसे मैं मयखाना छोड़ दूं
शायरी बन चुकी है अब सांसे मेरी
फिर कैसे कलम चलाना छोड़ दू

दिल लगाने से पहले मैं शायर ना था
तेरे ठुकराने से पहले मैं शायर ना था
तेरे हिजर ने सिखा दी हमें शायरी
कलम उठाने से पहले मैं शायर ना था

एक-एक अल्फाज एक एक अश्क से सजाया है
स्याही में हमने अपना खून दिल मिलाया है
इन शेरों मे ही छुपी है मेरी उमरे दास्तान
पढ़ोगे तो जान जाओगे कौन अपना पराया है


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वो हमें भूल जाते हैं जिन्हें हम याद करते हैं
दिल जिन्हें चाहता है वो ही बर्बाद करते हैं
उनका हर सितम याद बनकर रहता है सीने में
उनके हर सितम को शेरों मैं ही दाद करते हैं

धड़कता है दिल रुक रुक के
देखती हैं निगाहें छुप छुपके
मेरी शायरी को लतीफा ना समझो
निकले हैं अल्फाज दिल फूकफूक के


 Best dosti shayari


मेरे अजीज मुझसे सवाल अजब पूछते हैं
देख के उदासी बेचैनी का सबब पूछते हैं
तुम तो बेवफा ना थे फिर क्यों मिली बेवफाई
किसने ढाया मुझ पर यह गजब पूछते हैं

मेरे दिल पर बिजलियां गिराया ना करो
अपने हुस्न से नकाब उठाया ना करो
वरना हम मंजिल ही भूल जाएंगे सनम
जाल जुल्फों के साहिल पे बिछाया ना करो

मिल जाती वह मुझको इसी जन्म में दोस्तों
गर बीच में हमारे कॉम की लखिर ना होती
ना जाने कैसे जीता दीवाना उसकी हिजर में
गर पास मेरे उसकी लिखी तहरीर ना होती

किसी की यादों में क्यों वक्त अपना बर्बाद करें
जो हमें भुलाए बैठे हो हम क्यों उन्हें याद करें
यूं दर-दर भटकने से तड़पने से क्या मिलेगा
इससे बेहतर है क्यों ना हम भी अपना जहां आबाद करें

आंखों में बसाए रखते हैं मयखाना प्यार का
फिर भी मैं हूं दोस्तों दीवाना प्यार का
दो मतवाले जब भी प्यार करते है
कभी दुश्मन हो जाता है क्यों जमाना प्यार का



मायूस दिल पर ठेस लगाया ना करो
ए दोस्त इतना भी सताया ना करो
पहले ही से हिजर की आग में जलते हैं
गम की आग मैं हमें जलाया ना करो

कौन किसी का होता है इस जमाने में
लोग खुश हैं हम दीवानों को मिटाने में
जिन चिरागों ने किया घर रोशन मेरा
आंधियों ने दिया साथ वह चिराग बुझाने में

तेरी याद में देख अब भी जिंदा हूं मैं
तुझ पे नहीं अपनी वफा पर शर्मिंदा हूं मैं
पंख काट कर कैद कर दिया गम के पिंजरे में
मोहब्बत की दुनिया का एक परिंदा हूं मैं

कुछ तो मेरे दिल के जख्म इतने गहरे थे
उन पर भी लगे मेरे अश्कों के पहरे थे
तेरे ठुकराने के बाद तो मरना ही था
मुझको क्योंकि हम दुनिया मैं तेरे लिए ही ठहरे थे

हर ख्वाब तूने मेरा चूर कर दिया
दीवाने को मरने पर मजबूर कर दिया
जिसमें खुद को देख कर जीता रहा अब तक
मुझसे मेरा वह आईना ही दूर कर दिया


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दिल अश्क बहाता है जब तेरी याद सताती है
जब अरमान पूरे ना हो तो फरियाद सताती है
अब तन्हा हूं कोई नहीं जो सुने शेर मेरे
जब शेयर लिखता हूं तो तेरी याद सताती है

फाड़ देना खत कोई किताब समझ कर
अब मुझे भूल जा तू ख्वाब समझ कर
कल गर मे ना रहा तो आकर मय्यत पर
चढ़ा के चादर कर्ज उतारना हिसाब समझ कर

अपने ही हाल पर रोता हूं मैं जख्म यूं दिल के पिरोता हूं मैं

कौन रोएगा अब मुझे याद करके भला कौन किसी का होता हूं मैं

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तेरी वफा पर ए सनम मुझको कतई शक नहीं
जब से बनी तुम रकीबों की रहा दीवाने का हक नहीं

मेरी मैयत पर अश्क बहाना छोड़ दे जा जा कर दो खुशियों को अपना ले
मुझ बदनसीब के मुकद्दर में थी मौत किसी खुशनसीब को जिंदगी बना ले

बिन हमारे जीने की तुम फितरत बना लो
जुस्तजू को हमारी अपने दिल से निकालो
मर गए हम तुम से वफा करते करते
मय्यत पर हमारी दोअश्क ही बहा लो

ना चाहते हुए भी तुम मुझे भुला देना
नाम मेरा हो सके जेहन से मिटा देना
ना मिलने दिया हमें जिन दुश्मनों ने
उनकी सलामती को भी दुआ देना



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फिजूल में वक्त बर्बाद ना करना
तुम मुझको अब याद ना करना
जुदा हुए हम खुदा की रजा से
मिलाने की उससे फरियाद ना करना

क्या कुछ ना किया मैंने तेरे प्यार में
फना कर दी जिंदगी मोहब्बत के व्यापार में
मर गए हम तो क्या हुआ मेरे सनम
आंखें है खुली तेरे खत के इंतजार में

भुला ना जाए तुम्हें हमने भुला के देखा है
दिल से मोहब्बत के निशा मिटा के देखा है
दिया दगा उसी ने विश्वास था जिसपे किया
हर शख्स को हमने दोस्त आजमा के देखा है

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