👧 Gulzar Shayari In Hindi 🤓 Read Gulzar Poetry In Hindi Lyrics ]*

 

Gulzar is an Indian poet, lyricist and film director. He is Born in Jhelum District in British India and also wrote poetry, dialogues and scripts. He was awarded Padma Bhushan, the third-highest civilian award in India.Here we are representing his one of most famous poetry “Kitaabain jhankti hain band almari k sheeshoon se- Gulzar shayari in hindi

Read And Share Gulzar Shayari In Hindi

किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होती

जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें

उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं
कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं

बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है

किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, वो कट गया है
कभी सीने पर रखकर लेट जाते थे
कभी गोदी में लेते थे

कभी घुटनों को अपने रिहल की सूरत बनाकर
नीम सजदे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी
मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
और महके हुए रुक्के

किताबें मँगाने, गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
उनका क्या होगा
वो शायद अब नही होंगे!!

Listen this Poem (Kitaabain jhankti hain band almari k sheeshoon se- Gulzar shayari in hindi)

Some more Popular Gulzar Shayari In Hindi & English

Enna sona kyun Rabb ne banaya
Enna sona kyun Rabb ne banaya l

Aavan jaavan te main yaara nu manawa
Aavan jaavan te main yaara nu manawa
Enna sona, enna sona

मैं तुझे अपनी आँखों में भर तो लूँ ज़रा,
न जाने क्यों वक़्त को, गुज़रने की हड़बड़ी है|
गुज़र जायेगा मगर.. फिर से आएगा ज़रूर,
ये जीवन दुःख और सुख की कड़ी दर कड़ी है|
हैरत है के अब भी जिंदा हूँ किस तरह,
देख जिंदिगी अब भी उसी मकाम पर खड़ी है|
ख़ामोशी का मतलब सुकून है.. या बेबसी है,
तुझ बिन हर मंज़र में मगर कोई कमी है|

 

बारिश आती है तो पानी को भी लग जाते हैं पाँव
दर-ओ-दीवार से टकरा के गुज़रता है गली से
और उछलता है छपाकों में
किसी मैच में जीते हुए लड़कों की तरह
जीत कर आते हैं जब मैच गली के लड़के
जूते पहने हुए कैनवस के उछलते हुए गेंदों की तरह
दर-ओ-दीवार से टकरा के गुज़रते हैं
वो पानी के छपाकों की तरह …

 

शाम आयी तेरी यादों के सितारे निकले
रंग ही ग़म के नहीं नक़्श भी प्यारे निकले
रक्स जिनका हमें साहिल से बहा लाया था
वो भँवर आँख तक आये तो क़िनारे निकले
वो तो जाँ ले के भी वैसा ही सुबक-नाम रहा
इश्क़ के बाद में सब जुर्म हमारे निकले

 

मैं जब भी गुजरा हूँ इस आईने से,
इस आईने ने कुतर लिया कोई हिस्सा मेरा.
इस आईने ने कभी मेरा पूरा अक्स वापस
नहीं किया है–
छुपा लिया मेरा कोई पहलू,
दिखा दिया कोई ज़ाविया ऐसा,
जिससे मुझको,मेरा कोई ऐब दिख ना पाए.

मैं खुद को देता रहूँ तसल्ली
कि मुझ सा तो दूसरा नहीं है !!

 

अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो कि दास्ताँ आगे और भी है
अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो
अभी तो टूटी है कच्ची मिट्टी, अभी तो बस जिस्म ही गिरे हैं
अभी तो किरदार ही बुझे है,
अभी सुलगते हैं रूह के ग़म 
अभी धड़कतें है दर्द दिल के
अभी तो एहसास जी रहा है

यह लौ बचा लो जो थक के किरदार की हथेली से गिर पड़ी है
यह लौ बचा लो यहीं से उठेगी जुस्तजू फिर बगुला बन कर
यहीं से उठेगा कोई किरदार फिर इसी रोशनी को ले कर
कहीं तो अंजाम-ए-जुस्तजू के सिरे मिलेंगे
अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो

आओ तुमको उठा लूँ कंधों पर
तुम उचककर शरीर होठों से चूम लेना
चूम लेना ये चाँद का माथा

आज की रात देखा ना तुमने 
कैसे झुक-झुक के कोहनियों के बल
चाँद इतना करीब आया है

 

खाली डिब्बा है फ़क़त, खोला हुआ चीरा हुआ
यूँ ही दीवारों से भिड़ता हुआ, टकराता हुआ
बेवजह सड़कों पे बिखरा हुआ, फैलाया हुआ
ठोकरें खाता हुआ खाली लुढ़कता डिब्बा

यूँ भी होता है कोई खाली-सा- बेकार-सा दिन
ऐसा बेरंग-सा बेमानी-सा बेनाम-सा दिन….

माँगा है जो तुमसे वो ज़्यादा तो नहीं है
देने को तो जाँ दे दें, वादा तो नहीं है
कोई तेरे वादों पे जीता है कहाँ

मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी

जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के

तेरे केनवास नु वलांगी
पता नही किस तरह कित्थे
पर तेनु जरुर मिलांगी
जा खोरे इक चश्मा बनी होवांगी
ते जिवें झर्नियाँ दा पानी उड्दा
मैं पानी दियां बूंदा
तेरे पिंडे ते मलांगी
ते इक ठंडक जेहि बण के
तेरी छाती दे नाल लगांगी
मैं होर कुच्छ नही जानदी
पर इणा जानदी हां
कि वक्त जो वी करेगा
एक जनम मेरे नाल तुरेगा
एह जिस्म मुक्दा है
ता सब कुछ मूक जांदा हैं
पर चेतना दे धागे

कायनती कण हुन्दे ने
मैं ओना कणा नु चुगांगी
ते तेनु फ़िर मिलांगी

ye khel aakhir kisliye man nahi ubta
kai kai baar to khel chuke hain
ye khel ham apni zindagi me
khel khela hain khelte rahe hain
natiza fir vahi ek jaisa 
ek baaki rahta hain, haansil kya hota hain
zindagi har ek dusre ke andhere me hain
aakhir kisliye

ek kahani hain sunaau, kahaani do premiyo
dono javaan khubsurat akalmand
ek ka dusre se bepnaah pyaar
kasmo me bandhe huye ki janm janmantar tak
ek dusre ka saath nibhayenge
magar fir alag ho gaye
naujavaan fauz me chala gaya
gaya to laut ke nahi aaya
laapta ho gyaa

logo ne kaha mar gaya
magar mehbuba atal thi
boli ki wo lautega jarur lautega
pure chalish saalo tak saadhna me rahi
vafadaari se intjaar kiya
aakhir ek roz mehbub ka sandesh mila
main aa gaya hun sivaan vaale mandir me milo
kahne lagi dekha maine kaha tha na
daur kar gayi mandir pahuchi
par premi na dikhai diya
ek aadmi baitha tha ek dam budha
popla muh daant ganji aankho me mail
boli yaha to koi nahi
jarur kisi ne shararat ki hain
maayus hokar ghar lauti

waha mandir me intjaar karte karte
vo bhi thak gaya koi nahi aaya
chidiya ka bachcha tak nahi
ha ek budhiya aai thi
kamar se jhuki hui, baal uljhe uhe
aankh me motiyabandi
mandir me jhaankar dekha kuch badbdaai
aur apne hi saath
baat karte huye dur chali gayi
nirash ho gaya bechara bola
usne intjar nahi kiya
grsti rajkar mujhe bhul gayi
sandesha bheja tha
fir bhi milne tak nahi aai
kisliye aya
aakhir kisliye ye khel man nahi ubta

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One Response to “👧 Gulzar Shayari In Hindi 🤓 Read Gulzar Poetry In Hindi Lyrics ]*”
  1. arun upadhayay May 11, 2018

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