इंतज़ार शायरी Intezaar Shayari in Hindi Read and Share

इंतज़ार शायरी Intezaar Shayari in Hindi Read and Share
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आज हम आपके लिए लाये है इंतज़ार शायरी खास आपके लिए…

कविता लिखने बैठी तो खिड़की से झांकती पेड़ों की फुनगियो पर बैठी
अलसाई धूप ने पूछा क्या सवेरे की नर्म धूप का उजाला है तुम्हारी कविता में …

Intezaar Shayari in Hindi

कविता लिखने बैठी तो
खिड़की से झांकती
पेड़ों की फुनगियो पर बैठी
अलसाई धूप ने पूछा
क्या सवेरे की नर्म धूप का
उजाला है तुम्हारी कविता में …

 

तभी अचानक एक चिड़िया
खिड़की के सरिए पर आ बैठी
अपने पंख फड़फड़ा कर बोली
क्या मेरे पांव की तरह
आसमान नापने की उमंग
है तुम्हारी कविता में …

 

फूलों पर मँडराती – इठलाती
रंग-बिरंगी तितली ने कहा
क्या मेरे पीछे दौड़ते-भागते
बच्चों के चेहरे पर आई
खुशी की खिलखिलाहट है …

 

रंम्भाते बछड़े की तरह
क्या तुम्हारी कविता
व्याकुल करती है किसी का हृदय
लौटाने के लिए …

 

या कोयल के स्वर की मिश्री
घोल पाती है किसी के मन प्राण में
वायु की तरह
नवजीवन का संचार करती है
या झरने-सा मधुर संगीत भरती है
चंद्रमा-सा शीतल सौंदर्य
क्या दृष्टिगत होता है
कविता में तुम्हारी …



कि तभी मोर ने पंख फैलाकर कहा
क्या बादलों सा प्यार
बरसाती है धरती पर
या मुझसामुग्ध करने वाला
नृत्य है तुम्हारी कविता में …

 

और फिर मेरी चुप पर
सब एक साथ हँसे
अब तक क्या सच में एक भी कविता
लिख पाई हो तुम
या आज तक बस पन्नों पर
श्याही बिखरती आई हो!

 


देख कर मेरा नसीब, मेरी तकदीर रोने लगी।

लहू के अल्फाज देख कर देख कर,

तहरीर रोने लगी ।हिज्र में दीवाने ,

की हालत कुछ ऐसी हुई ।

सूरत को देखकर, खुद तस्वीर रोने लगी।


Intezaar Shayari


कहते हैं लोग ,खुदा की इबादत है।

यह मेरी समझ में , तो एक जहालत है ।

चैन ना आए दिल को ,रात जाग कर गुजरे।

जरा बताओ दोस्तों ,क्या यही मोहब्बत है।


Aaj yu hi achanak wo fir yaad aaye


गम ‘ए’ हिजर से, जिसकी आंख ना रोई ।

भूल गई वो उसका, दीवाना है कोई ।

जिन से बिछड़कर हमने, आंसू ही बहाए ।

आज यूं ही अचानक, वो फिर याद आए ।

सितमगर बनके ………………!!

 

जिस्म का हमने, जिसे खून पिलाया ।

चाहत में खुशी की, उसने ही ठुकराया ।

क्या अपने क्या गैर ,सभी आजमाएं।

आज यूं ही अचानक, वो फिर याद आए ।

सितमगर बनके ………………!!

 

मेरे उजड़ने का जिसने ,गम ना मनाया ।

मेरा खून ‘ए’ जिगर। हाथों पर लगाया,

हमारी बर्बादी पर,जिसने जश्न मनाए।

आज यूं ही अचानक, वो फिर याद आए ।

सितमगर बनके ………………!!

 

खुश है जो गैरों के ,आगोश में जाकर ।

हमें उजाड़ के बैठे, घर अपना बसा कर।

दिल तोड़ कर भी, जो ना पछताए।

आज यूं ही अचानक ,वो फिर याद आए ।

सितमगर बनके ………………!!

 

बरसों से बैठे थे,जिन्हें हम भुलाए ।

आज यूं ही अचानक ,वो फिर याद आए ।

सितमगर बन के , सितम जिसने ढाये |

यूं ही अचानक वो फिर से याद आए |

सितमगर बनके ………………!!



Tu ab to sitam chore de


तूने जो तोड़ा दिल मेरा एक टुकड़ा ही उसका मोड़ दे |

अब तो सितम छोड़ दे ..  तू अब तो सितम छोड़ दे  ||

 

थक चुका हूं अब मैं, ग़मों से भाग भाग के |

रात कटती है मेरी, यादों में तेरी जाग के |

कह दे अपनी यादों से, अब रिश्ता मुझसे तोड़ दे |

अब तो सितम छोड़ दे, तू अब तो सितम छोड़ दे |

 

जब जब वो मेरे पास आती है

एक महका महका सा एहसास छोड़ जाती है

न हम कुछ बोल पत है न वो कुछ

बस दिल ही दिल प्यार का इज़हार कर जाती है!!



तेरे प्यार में हमने तो यह सीखा
बदला मोहब्बत का अब तो सलीका

मिले ना ढूंढे से लैला मजनू की जोड़ी
सच्ची मोहब्बत दिलों में रह गई थोड़ी
खबर नहीं कब छोड़े कोई दामन किसी का
तेरे प्यार में हमने तो यह सीखा

भला उससे क्या दिल लगाएगा कोई
ठुकराए हुए को क्या अपना आएगा कोई
जिसके नसीब में ना हो एक पल खुशी का
तेरे प्यार में हमने तो यह सीखा

यह भी जानते हैं जिन्होंने ठुकराया
की दीवाने ने अब तक न कोई अपनाया
न मौत को अपनाया न छोड़ा दामन जिंदगी का
तेरे प्यार में हमने तो यह सीखा ||


वो एक नूर

एक नूर था वो, जिसे कोई भी अभिमान नहींं,

दुनिया को उसकी दमक पर, फिर भी कोई ऐतबार नहींं।

अग्नि के पथ पर चलकर उसे, कभी कोई ऐतराज़ नहींं,

रक्त की आंधी में भी, साहस का उसके कोई जवाब नहीं।

मुश्किल में खुद मिटकर वो, सबका सहारा ही बनी,

ऐसे किरदार का जहां में,फिर भी कोई श्रृंगार नहींं।

कुर्बान हुई हर वक्त वही, रिश्तों को उसका लिहाज़ नहींं,

तराशी जाये तो ‘कोहिनूर ‘ है वो,

क्यूं किसी चौखट पर उसका, इंतज़ार नहींं ??

दर्द का है हर अंत वही, विष की छाया से भी उसे इनकार नहींं,

शीश नवाये उसे रहीम, पलक पर उसकी अश्क छलकने का भी वरदान नहींं।

जिंदगी उसकी खुली किताब, रिश्तों में उलझा उसका संसार यहीं,

सांझ में जलती, दीया की बाती भी बनती,

महत्व का अपने, उसे भी अहसास नहींं।

उसका जहां में तोड़ नहींं,

पहले बेटी, किसी की बहन भी बनी,

मां बनकर रचा उसी ने संसार,

‘ औरत ‘ बिन जहां में कोई, ‘इतिहास’ नहींं।।


जरा देखो तो ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है !
अगर “इश्क” हो तो कहना,
कि अब दिल यहां नहीं रहता !!

उठ उठ कर इंतजार करके देखना
‎कभी तुम भी किसी से प्यार करके देखना

 


Kuch dino se mera Aaina
Mujhe achha Lage !
Jab iSe Dekhu Mera Chehra
Tera Chehra Lage !!

 

Kisne Kaha Zameen Par

Taare Bicha Ke Dekh

Mitti ka ek Chirag

jami par Jala Ke Dekh


अधिक नहीं , वे अधिकतर की बात करते हैं
नदी को छोड़कर समंदर ही बात करते हैं

हमारे दौर में इंसान का अकाल रहा
ये लोग फिर भी पयंबर की बात करते हैं

जिन्हे भरोसा नहीं है स्वयं की मेहनत पर
वे रोज ही किसी मंत्र के बात करते हैं

नहीं है नीव के पत्थर का जिक्र जिनके यहां
ये बेशकीमती पत्थर की बात करते हैं

ये अफसरी भी मनोरोग बन गई आखिर
वो अपने घर में भी दफ्तर की बात करते हैं

मैं कैसे मान लूं वो लोग हो गए हैं निडर
जो बार-बार किसी डर की बात करते हैं

वो अपने आगे किसी और को नहीं गिनते
वो सिर्फ अपने ही शायर की बात करते हैं


Hey sara jism jhuk kar
Bojh se duhra hua hoga,
Mein sajde Mein nahi tha
Aapko Dhoka Hua hoga !!



Lo Aaj Humne Tod Diya

Rishta – e – Umeed

low ab kabhi Gila

Na Karenge Kisi Se Hum

Khushi Chini Hai To

Gham Ka bhi etmad Na Kar

Jo rooh gam se bhi

ukta Gayi To Kya Hoga||


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