Kabhi Kabhi Mere Dil Mein by Sahir ludhianvi Poetry in Hindi

Poet/Shayar Introduction


Sahir was an Indian poet and film lyricist who wrote in the Hindi and Urdu languages.

Sahir was educated at the Khalsa High School in Ludhiana.Sahir’s poetry has a Faizian quality. Like Faiz, Sahir gave Urdu poetry an intellectual element that caught the imagination of the youth of the 1940s, 1950s and 1960s and reflected the feelings of the people of the age.


 

 

 

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता हैं

कि ज़िंदगी तेरी जुल्फों कि नर्म छांव मैं गुजरने पाती
तो शादाब हो भी सकती थी।

यह रंज-ओ-ग़म कि सियाही जो दिल पे छाई हैं
तेरी नज़र कि शुआओं मैं खो भी सकती थी।

मगर यह हो न सका और अब ये आलम हैं
कि तू नहीं, तेरा ग़म तेरी जुस्तजू भी नहीं।

गुज़र रही हैं कुछ इस तरह ज़िंदगी जैसे,
इससे किसी के सहारे कि आरझु भी नहीं.

न कोई राह, न मंजिल, न रौशनी का सुराग
भटक रहीं है अंधेरों मैं ज़िंदगी मेरी.

इन्ही अंधेरों मैं रह जाऊँगा कभी खो कर
मैं जानता हूँ मेरी हम-नफस, मगर यूंही

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता है.

कि ज़िंदगी तेरी जुल्फों कि नर्म छांव मैं गुजरने पाती
तो शादाब हो भी सकती थी।


Written By: Sahir Ludhianvi


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2 Comments

  1. sonam January 11, 2017
  2. free pokemon coins March 7, 2017

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