kisi mausum ka jhonka tha – Gulzar poems in hindi

Poet/Shayar Introduction


Gulzar is an Indian poet, lyricist and film director.

Born in Jhelum District in British India and also wrote poetry, dialogues and scripts. He was awarded Padma Bhushan, the third-highest civilian award in India.

Here we are representing his one of most famous poetry “kisi mausum ka jhonka tha – Gulzar poems in hindi



किसी मौसम का झोंका था
जो इस दीवार पर लटकी तस्वीर तिरछी कर गया है

गए सावन में ये दीवारे यूँ सीली नहीं थी
न जाने क्यों इस दफा इन् में सीलन आ गयी है
दरारें पड़ गयी हैं
और सीलन इस तरह बहती है जैसे
खुश्क रुखसारों पर गीले आंसूं चलते हैं

किसी मौसम का झोंका था
जो इस दीवार पर लटकी तस्वीर तिरछी कर गया है

ये बारिश गुनगुनाती थी इन्ही छत की मुंडेरों पर
ये घर की खिड़कियों पर उँगलियों से लिख जाती थी संदेसे

बिलखती रहती है अब बंद रोशनदानों के पीछे
दोपहर ऐसी लगती हैं
बिना मोहरों के खाली खाने रक्खे हैं

न कोई खेलने वाला है बाज़ी , न कोई चाल चलता है
न दिन होता है अब न रात होती है
सभी कुछ रुक गया है

किसी मौसम का झोंका था
जो इस दीवार पर लटकी तस्वीर तिरछी कर गया है

Written By: Gulzar


Listen this shayari (Gulzar poems in hindi)


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