Mirza ghalib shayari in hindi

Mirza ghalib shayari in hindi



Hathoon key lakiroon pay matt jaa ae Ghalib,
Naseeb unkay bhi hotay hain jinkaay haath nahi hotay

Sarayy raah jo unsaay nazarr mili,
To naksh dil kay ubharr gayay,
Hum nazarr mila kar jhijhag gayay,
Woh nazarr jhukaa kar chalay gayay

Sabnay pahnaa tha baday shaukk se kaagaz ka libaas,
Jis kadarr logg thay baarish me nahaanay walay,
Adal ke tum na humay aas dilaaoo,
Katl ho jatay hain, zanzeer hilanay walay

Nuktaa chi hai gam e dil, key sunayaa na banay,
Kya baat banay wahan, jahan baat banyay na banay,
Ishq par zorr nahi hai yeh woh attissh Ghalib,
Jo lagaye na lagay bhujhaye na banay

Har eik baat pay kehtay ho tum key ‘toh kya hai’ ?
Tumhi kaho key ye andaaz-e-guftguu kya hai ?
Ragon may daudtay firnay kay ham nahi qayal,
Jab aankh hi say na tapkaa to firr lahoo kya hai ?



हम ने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला ,
होश तब आया जब उस ने कहा कि खुदा किसी एक का नहीं होता !

तू वो ज़ालिम है जो दिल में रह कर भी मेरा न बन सका “ग़ालिब ”,
और दिल वो काफिर जो मुझ में रह कर भी तेरा हो गया

हाथों की लकीरों पे मत जा ऐ ग़ालिब,
नसीब उन के भी होते हैं जिन के हाथ नहीं होते

इश्क़ पर ज़ोर नहीं , यह वह आतिश है ग़ालिब ,
कि लगाये ना लगे और बुझाए ना बुझाय

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन ,
दिल के खुश रखने को , ग़ालिब यह ख़याल अच्छा है

इश्क़ ने ‘ग़ालिब ‘, निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे , काम के

ज़िन्दगी उसकी जिस की मौत पे ज़माना अफ़सोस करे , “ग़ालिब” ,
यूं तो हर शख्स आता है इस दुनिया में मरने के लिए

क़ासिद के आते -आते खत एक और लिख रखूँ
मैं जानता हूँ जो वह लिखेंगे जवाब में

कब से हूँ क्या बताऊँ, जहान-ए-खराब में,
शब हाये हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में

मुझ तक कब उनकी बज़्म में, आता था दौर-ए-जाम,
साकी ने कुछ मिला ना दिया हो शराब में

ता-फिर ना इंतज़ार में नींद आये उम्र भर,
आने का अहद कर गये, आये जो ख्वाब में

ग़ालिब छुटी शराब, पर अब भी कभी कभी,
पीता हूँ रोज़-ए-अब्र-ओ-शब-ए-माहताब में

और बाज़ार से ले आये अग़र टूट गया ,
सागर-ए-जम से मेरा जाम-ए-सिफ़ाल अच्छा है।

उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक ,
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।

देखिये पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ ,
इक बिराहमन ने कहा है के ये साल अच्छा है।

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन ,
दिल के खुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख्य़ाल अच्छा है।

उड़ने दे इन परिंदों को आज़ाद फिजां में ‘गालिब’
जो तेरे अपने होंगे वो लौट आएँगे…

ना रख उम्मीद-ए-वफ़ा किसी परिंदे से …
जब पर निकल आते हैं …
तो अपने भी आशियाना भूल जाते हैं…

सारी राह जो उनसे नज़र मिली ,
तो नक्श दिल के उभर गये ,
हम नज़र मिला कर झिझग गये ,
वह नज़र झुका कर चले गये ….

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास ,
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले ,
अदल के तुम ना हमे आस दिलाओ ,
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले …

नुक्ता ची है गम ऐ दिल , कि सुनाये ना बने ,
क्या बात बने वहां , जहाँ बात बनाये ना बने ,
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है यह वो आतिश ग़ालिब ,
जो लगाये ना लगे भुझाये ना बने …

हर एक बात पे कहते हो तुम की ‘तो क्या है ’ ?
तुम्ही कहो कि ये अंदाज़ -ऐ -गुफ्तगू क्या है ?
रागों मई दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल ,
जब आँख ही से ना टपका तो फिर लहू क्या है ?

Written By: Ghalib

Also Read:

http://shayaribazaar.com/koi-deewana-kehta-hai-by-kumar-vishwas/

http://shayaribazaar.com/whatsapp-hindi-shayari/

http://shayaribazaar.com/kab-se-kehne-ki-himmat-juta-raha-hun-love-shayari/

======================================Thanks for visit==============================

If you like this post ,

please leave your valuable comments and suggestion in the below mention sections.

and like and visit our “Facebook page” https://www.facebook.com/shayaribazaar for other best hindi shayaris and latest posts.


Add Comment

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.