Raat Bhar Sard Hawa chalti rahi – Gulzar poetry in hindi

Introduction of Poet/Shayar


Gulzar is a very famous shayar and writer of India.

Gulzar was born in a Kalra Arora Sikh family, to Makhan Singh Kalra and Sujan Kaur, in Dina, Jhelum District, British India (now in Pakistan)

Here we are presenting very popular poetry “Raat Bhar Sard Hawa chalti rahi  – Gulzar poetry in hindi


रात भर सर्द हवा चलती रही
रात भर हमने अलाव तापा

मैंने माज़ी से कई खुश्क सी शाखैं काटी
तुम ने भी गुज़रे हुए लम्हों के पत्ते तोड़े

मैंने जेबों से निकाली सभी सुखी नज़्में
तुम ने भी हाथों से मुरझाये हुए खत खोले

अपनी इन आँखों से मैंने कई मांजे तोड़े
और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकी
तुम ने , पलकों पे नमी सूख गयी थी , सो गिरा दी

रात भर जो भी मिला उगते बदन पर हमको
काट के दाल दिया जलते अलावों मैं उसे
रात भर फूँकों से हर लौ को जगाये रखा

और दो जिस्मों के ईंधन को जलाये रखा
रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने

रात भर सर्द हवा चलती रही
रात भर हमने अलाव तापा

Written ByGulzar


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