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hazaaron khwaishein aisi -Gulzar shayari on life

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बोहत निकले मेरे अरमान , लेकिन फिर भी काम निकले . डरे क्यों मेरा क़ातिल ? क्या रहेगा उस की गर्दन पर ? वोह खून , जो चश्म -ऐ -तर से उम्र भर यूं दम -बा -दम निकले निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिन …