Two line shayari on love

हाथ की लकीरो पे मत जा ऐ ग़ालिब ,
नसीब उनके भी होते हैं , जिन के हाथ नहीं होते…!

यही सोच कर उस की हर बात को सच माना है ग़ालिब ,
की इतने ख़ूबसूरत लब झूठ कैसे बोलेंगे . .!

मंज़िल तो मेरी यहीं है कब्रिस्तान में ग़ालिब ,
तेरी उल्फत ने मोहब्बत मेरी आदत कर दी . .!

वो शायद मतलब से मिलते हैं,
मुझे तो मिलने से मतलब है.

तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे,
मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो।

उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा..
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है…

हाथ ज़ख़्मी हुए तो कुछ अपनी ही खता थी…..
लकीरों को मिटाना चाहा किसी को पाने की खातिर….

वो इस तरह मुस्कुरा रहे थे , जैसे कोई गम छुपा रहे थे..
बारिश में भीग के आये थे मिलने , शायद वो आंसु छुपा रहे थे..

आज उसकी एक बात ने मुझे मेरी गलती की यूँ सजा दी…
छोड़ कर जाते हुए कह गई,
जब दर्द बर्दाश्त नहीं होता तो मुझ से मोहब्बत क्यूँ की….

उसके साथ जीने का इक मौका दे दे, ऐ खुदा..
तेरे साथ तो हम मरने के बाद भी रह लेंगे..

उठाये जो हाथ उन्हें मांगने के लिए,
किस्मत ने कहा, अपनी औकात में रहो।

इक बात कहूँ “इश्क”, बुरा तो नहीँ मानोगे
बङी मौज के थे दिन, तेरी पहचान से पहले

इश्क़ पाने की तमन्ना में कभी कभी ज़िंदगी खिलौना बन कर रह जाती है;
जिसके दिल में रहना चाहते हैं, वो सूरत सिर्फ याद बन कर रह जाती है।.

उन्होंने कहा, बहुत बोलते हो, अब क्या बरस जाओगे
हमने कहा, चुप हो गए तो तुम तरस जाओगे

किसी के ज़ख्म का मरहम, किसी के ग़म का ईलाज
लोगो ने बाँट रखा है मुझे.. दवा की तरह

उन्होंने कहा, बहुत बोलते हो, अब क्या बरस जाओगे
हमने कहा, चुप हो गए तो तुम तरस जाओगे

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