Intezaar shayari in hindi

शायरी एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा लोग अपने दिल की बात कह सकते है और दुनिया को अपनी भावना बता सकते हैं
आज हम लाये है आपके लिए इंतज़ार शायरिया जो बताती है कि कैसे कोई महसूस करता है किसी के लिए इंतज़ार में – Intezaar shayari

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
में बच भी जाता तो मरने वाला था

मेरा नसीब मेरे हाथ कट गए
वरना में तेरी मांग में सिन्दूर भरने वाला था

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Ye haadsaa to kisee din gujarne waalaa tha
Me bach bhi jaataa to marne waalaa tha

Mera naseeb mere haath kat gaye
Warnaa me teri maang me sindoor bharne waalaa tha

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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

मोड़  होता हैं जवानी का संभलने  के लिए
और सब लोग यही आके फिसलते क्यों हैं

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Log har mod pe ruk ruk ke sambhalte kyo hain
Itna darte hain to ghar se nikalte kyo hain

Mod hota hain jawani ka sambhalne ke liye
Aur sab log yahi aake fisalte kyo hain

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हम आपको अपने दिल से जुदा कभी कर नहीं सकते
हम बिना मौत के मर नहीं सकते
आप मेरी धड़कन हैं हम जीते जी
अपनी धडकन को अपने आप से दूर कर नहीं सकते

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तुफानो से आँख मिलाओ, सैलाबों पे वार करो
मल्लाहो का चक्कर छोड़ो, तैर कर दरिया पार करो

फूलो की दुकाने खोलो, खुशबु का व्यापर करो
इश्क खता हैं, तो ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

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Tufaano se aankh milayon, saelabon pe war karo
Mallaho ka chakkar chodo, taer kar dariya paar karo

Phoolon ki dukaane kholo, khushbu ka vyaapar karo
Ishq khata hain, to ye khata aek baar nahi, sau baar karo

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लुफ्त ए इश्क उठाता है कोई-कोई
किसी को दिल में बस आता है कोई कोई
दिल से बेवफाई करने वाले लाखों मिल जाते हैं
वफा के नाम से जान लुटाता है कोई-कोई
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उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर मंतर सब
चाक़ू वाक़ू, छुरियां वुरियां, ख़ंजर वंजर सब

जिस दिन से तुम रूठीं,मुझ से, रूठे रूठे हैं
चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब

मुझसे बिछड़ कर, वह भी कहां अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपड़े वपड़े, ज़ेवर वेवर सब

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Uski kathai aankho me jantar-mantar sab
Chaaku-waaku,chhuri-wuri,khanjar-wanjar sab

Jis din se tum ruthi,mujhse ruthe hain
Chaadar-waadar,takiya-wakiya,bistar-wistar sab

Mujhse bichhar ke wo kahaa pahle jaisi hai
Dhile par gaye kapde-wapre,zewar-webar sab

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वह हम पर दिल जान से मरता हैं
हम भी उन्हें बेपनाह प्यार करते हैं
वह हमें देखकर सजते हैं
हम भी उन्हें देखकर ठंडी आहें भरते हैं

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किसी के खातिर पल पल मरना ही प्यार है
पल पल किसी को इंतजार करना ही प्यार है
किसी की बातें याद कर के आंखों से आंसू बहने ही प्यार है
किसी को याद में पागल हो जाना ही प्यार है

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वह आई मेरी जिंदगी में टूटे हुए सितारे की तरह
हर भरी महफिल में भी तनहा है सागर के किनारे की तरह

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हम देना चाहते थे उन्हें बेशुमार खुशियां उनकी तकदीर में गम लिखे थे
हम बनना चाहते थे उनकी तन्हाई के साथ ही उनसे हमारे मिलने कम लिखे थे

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फूलों को तोड़ लेते हैं लोग लिखने से पहले
दो दिलों के बीच दीवार बन जाते हैं लोग मिलने से पहले

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तेरी याद में हम रोज लिखते हैं
एक शेर मैंने तुझे अपना समझा
मुझे समझने में कर दी है तुमने बहुत देर

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कविता लिखने बैठी तो
खिड़की से झांकती
पेड़ों की फुनगियो पर बैठी
अलसाई धूप ने पूछा
क्या सवेरे की नर्म धूप का
उजाला है तुम्हारी कविता में …

तभी अचानक एक चिड़िया
खिड़की के सरिए पर आ बैठी
अपने पंख फड़फड़ा कर बोली
क्या मेरे पांव की तरह
आसमान नापने की उमंग
है तुम्हारी कविता में …

फूलों पर मँडराती – इठलाती
रंग-बिरंगी तितली ने कहा
क्या मेरे पीछे दौड़ते-भागते
बच्चों के चेहरे पर आई
खुशी की खिलखिलाहट है …

रंम्भाते बछड़े की तरह
क्या तुम्हारी कविता
व्याकुल करती है किसी का हृदय
लौटाने के लिए …

या कोयल के स्वर की मिश्री
घोल पाती है किसी के मन प्राण में
वायु की तरह
नवजीवन का संचार करती है
या झरने-सा मधुर संगीत भरती है
चंद्रमा-सा शीतल सौंदर्य
क्या दृष्टिगत होता है
कविता में तुम्हारी …

कि तभी मोर ने पंख फैलाकर कहा
क्या बादलों सा प्यार
बरसाती है धरती पर
या मुझसामुग्ध करने वाला
नृत्य है तुम्हारी कविता में …

और फिर मेरी चुप पर
सब एक साथ हँसे
अब तक क्या सच में एक भी कविता
लिख पाई हो तुम
या आज तक बस पन्नों पर
श्याही बिखरती आई हो!

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