Kumar Vishwas Shayari In Hindi

Dr. Kumar Vishwas is a young generation Hindi language Shayar and poet and is also the voice of the youth. Dr. Kumar Vishwas birth on 10th February 1970 in Ghaziabad, Uttar Pradesh. He has performed not only in India but also in foreign countries like Japan, the USA, Dubai, and Singapore.

It is the biggest success For dr. Kumar Vishwas represents India in foreign countries. He joined the politic and he joined the Aam Aadmi Party but after some time he left the party. Kumar Vishwas has won many hearts with his tremendous piece of Shayaris.

If you are one to know more about Kumar Vishwas Shayari then you are in the right place. In this post, we are providing all Shayari of Kumar Vishwas in Hindi and English. Generally, he is a poet of relationship and love and you will find it great after reading it.


डॉ कुमार विश्वास भारत के विख्यात युवा लेखक व विचारक हैं और हिंदी कविता को नयी उचाईयो पर पहुचाने वाले महान कवि हैं , जो की अपने अलग अंदाज़ में कविता गायन व पठान के लिए जाने जाते है !

उन्ही की एक रचना से … उस पगली लड़की की बिन. . .!!


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Read Kumar Vishwas Shayari – koi deewana kehta hai 


अमावस  की  काली  रातों  में, जब दिल  का  दरवाजा  खुलता  है ,
जब  दर्द  की  प्याली  रातों  में,  गम  आंसूं के  संग  होते  हैं ,
जब  पिछवाड़े  के  कमरे  में , हम  निपट  अकेले  होते  हैं ,

 

जब  घड़ियाँ  टिक -टिक  चलती  हैं , सब  सोते  हैं , हम  रोते  हैं ,
जब  बार  बार  दोहराने  से  , सारी  यादें  चुक  जाती  हैं ,

 

जब  उंच -नीच  समझाने  में , माथे  की  नस  दुःख  जाती  हैं ,
तब  एक  पगली  लड़की  के  बिन  जीना  गद्दारी लगता  है ,

और  उस  पगली  लड़की  के  बिन  मरना  भी  भरी  लगता  है !!

 

जब  बासी  फीकी  धुप  समेटें , दिन  जल्दी  ढल  जाता  है ,
जब  सूरज  का  लश्कर , छत  से  गलियों  में  देर  से  जाता  है ,

जब  जल्दी  घर  जाने  की  इच्छा , मन  ही  मन  घुट  जाती  है ,
जब  कॉलेज  से  घर  लाने  वाली , पहली  बस  छुट  जाती  है ,

 

जब  बेमन  से  खाना  खाने  पर , माँ   गुस्सा  हो  जाती  है ,
जब  लाख  मन  करने  पर  भी , पारो  पढने  आ  जाती  है ,

 

जब  अपना  हर  मनचाहा  काम   कोई  लाचारी  लगता  है ,
तब  एक  पगली  लड़की  के  बिन  जीना  गद्दारी  लगता   है ,

और  उस   पगली  लड़की  के  बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है  !!

जब  कमरे  में  सन्नाटे  की  आवाज  सुनाई देती  है ,
जब  दर्पण  में  आँखों  के  नीचे  झाई  दिखाई  देती  है ,

 

जब  बड़की भाभी  कहती  हैं , कुछ  सेहत  का  भी  ध्यान  करो ,
क्या  लिखते  हो  दिनभर , कुछ  सपनों  का  भी  सम्मान  करो ,

 

जब  बाबा  वाली  बैठक  में  कुछ  रिश्ते  वाले  आते  हैं ,
जब  बाबा  हमें  बुलाते  हैं , हम  जाते  हैं , घबराते  हैं ,

 

जब  साड़ी  पहने  एक  लड़की  का,  एक  फोटो  लाया  जाता  है ,
जब  भाभी  हमें  मनाती  हैं , फोटो  दिखलाया  जाता  है ,

 

जब  सारे  घर  का   समझाना  हमको  फनकारी  लगता  है ,
तब  एक  पगली  लड़की  के  बिन  जीना  गद्दारी  लगता  है ,
और  उस  पगली  लड़की  के  बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है 

 
दीदी  कहती  हैं  उस  पगली  लड़की  की   कुछ  औकात  नहीं ,
उसके  दिल  में  भैया  , तेरे  जैसे  प्यारे  जज्बात   नहीं ,
 
 
वो   पगली  लड़की  नौ  दिन  मेरे   लिए  भूखी   रहती  है ,
छुप  -छुप  सारे  व्रत  करती  है , पर  मुझसे  कभी  ना  कहती  है ,
 
 
जो  पगली  लड़की  कहती  है , मैं  प्यार  तुम्ही  से  करती  हूँ ,
लेकिन  मै  हूँ  मजबूर  बहुत , अम्मा -बाबा  से  डरती  हूँ ,
 
 
उस  पगली  लड़की  पर  अपना  कुछ  अधिकार  नहीं  बाबा ,
ये   कथा -कहानी   किस्से  हैं , कुछ  भी  तो  सार  नहीं  बाबा ,
 
 
बस  उस  पगली  लड़की  के  संग   जीना  फुलवारी  लगता  है ,
और  उस  पगली  लड़की  के   बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है ||
 

More Kumar Vishwas Shayari


 
दिलों से दिलों का सफर आसान नहीं होता,
ठहरे हुए दरिया में तुफान नहीं होता,
मोहब्बत तो रूह में समा जाती है,
इसमें शब्दों का कोई काम नहीं होता,
मैं कवि हूं प्रेम का बांट रहा हूं प्रेम,
इससे बड़ा कोई काम नहीं होता”
 
 
बतायें क्या हमें किन-किन सहारों ने सताया है
नदी तो कुछ नहीं बोली, किनारों ने सताया है
सदा ही शूल मेरी राह से ख़ुद हट गए लेकिन
मुझे तो हर घडी हर पल बहारों ने सताया है
 
 
जब भी आना उतर के वादी में ,
ज़रा सा चाँद लेते आना तुम “
 
 
मिलते रहिए, कि मिलते रहने से
मिलते रहने का सिलसिला हूँ मैं.
 
 
गम में हूँ य़ा हूँ शाद मुझे खुद पता नहीं
खुद को भी हूँ मैं याद मुझे खुद पता नहीं
मैं तुझको चाहता हूँ मगर माँगता नहीं
मौला मेरी मुराद मुझे खुद पता नहीं”
 
 
रंग दुनियाने दिखाया है निराला, देखूँ
है अंधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ
आईना रख दे मेरे सामने, आखिर मैं भी
कैसा लगता हूँ तेरा चाहने वाला देखूँ  !!
 
 
तुमने अपने होठों से जब छुई थीं ये पलकें !
नींद के नसीबों में ख्वा़ब लौट आया था !!
रंग ढूँढने निकले लोग जब कबीले के !
तितलियों ने मीलों तक रास्ता दिखाया था !!
 
 
इन उम्र से लम्बी सड़को को, मंज़िल पे पहुंचते देखा नहीं,
बस दोड़ती फिरती रहती हैं, हम ने तो ठहरते देखा नहीं..!!
 
 
वो सब रंग बेरंग हैं जो ढूंढते व्यापार होली में,
विजेता हैं जिन्हें स्वीकार हर हार होली में,
मैं मंदिर से निकल आऊँ तुम मस्जिद से निकल आना,
तो मिलकर हम लगाएंगे गुलाल-ए-प्यार होली में 
 

Koi Deewana kahta hai – Kumar Vishwas Shayari


 
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दुर कैसा हूँ , तु मुझसे दुर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है य़ा मेरा दिल समझता है.
 
 
हर ओर शिवम-सत्यम-सुन्दर ,
हर दिशा-दिशा मे हर हर है
जड़-चेतन मे अभिव्यक्त सतत ,
कंकर-कंकर मे शंकर है…”
 
 
एक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा ,
हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा ,
आज जो बांधा है इन में तो बहल जायेंगे ,
रोज इन बाहों का त्योहार कहाँ आएगा…!!
 
 
जो किए ही नहीं कभी मैंने ,
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं.
मुझसे फिर बात कर रही है वो,
फिर से बातों मे आ रहा हूँ मैं !!
 
 
अपनों के अवरोध मिले, हर वक्त रवानी वही रही
साँसो में तुफानों की रफ़्तार पुरानी वही रही
लाख सिखाया दुनिया ने, हमको भी कारोबार मगर
धोखे खाते रहे और मन की नादानी वही रही…!!
 

तूफ़ानी लहरें हों
अम्बर के पहरे हों
पुरवा के दामन पर दाग़ बहुत गहरे हों
सागर के माँझी मत मन को तू हारना
जीवन के क्रम में जो खोया है, पाना है
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है !!

राजवंश रूठे तो
राजमुकुट टूटे तो
सीतापति-राघव से राजमहल छूटे तो
आशा मत हार, पार सागर के एक बार
पत्थर में प्राण फूँक, सेतु फिर बनाना है
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है

घर भर चाहे छोड़े
सूरज भी मुँह मोड़े
विदुर रहे मौन, छिने राज्य, स्वर्णरथ, घोड़े
माँ का बस प्यार, सार गीता का साथ रहे
पंचतत्व सौ पर है भारी, बतलाना है
जीवन का राजसूय यज्ञ फिर कराना है
पतझर का मतलब है, फिर बसंत आना है


Kumar Vishwas Shayari With Images


मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
 
 
पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना
जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना
मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है ||
 


 
पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना
जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना
मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है
हो ग़र मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना।
 
 
नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है,
मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है,
कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों,
सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है..!!

Read More Shayari in Hindi and English


 
ये दिल बर्बाद करके सो में क्यों आबाद रहते हो
कोई कल कह रहा था तुम अल्लाहाबाद रहते हो
ये कैसी शोहरतें मुझको अता कर दी मेरे मौला
मैं सभ कुछ भूल जाता हूँ मगर तुम याद रहते हो !!
 


 
बदलने को तो इन आखोँ के मंज़र कम नहीं बदले ,
तुम्हारी याद के मौसम,हमारे ग़म नहीं बदले ,
तुम अगले जन्म में हम से मिलोगी,तब तो मानोगी ,
ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले..!!

बदलने को तो इन आखोँ के मंज़र कम नहीं बदले ,
तुम्हारी याद के मौसम,हमारे ग़म नहीं बदले ,
तुम अगले जन्म में हम से मिलोगी,तब तो मानोगी ,
ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले..!!

सदा तो धूप के हाथों में ही परचम नहीं होता
खुशी के घर में भी बोलों कभी क्या गम नहीं होता
फ़क़त इक आदमी के वास्तें जग छोड़ने वालो
फ़क़त उस आदमी से ये ज़माना कम नहीं होता।


Best Shayari Of Dr. Kumar Vishwas Shayari 


सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा?
तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा,
भींग रही है काया सारी खजुराहो की मूरत सी,
इस दर्शन का और प्रदर्शन मत करना, मर जाऊँगा..!!



एक दो दिन में वो इकरार कहा आएगा
हर सुबह एक ही अखबार कहा आएगा
आज बंधा है जो इन् बातों में तो बहाल जायेंगे
रोज इन बाहों का त्यौहार कहा आएगा

उसी की तरहा मुझे सारा ज़माना चाहे,
वो मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे,
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,
ये मुसाफिर तो कोई ठिकाना चाहे..!!

हमारे शेर सुन कर भी जो खामोश इतना है
खुदा जाने गुरूर-ए-हुस्न में मदहोश कितना है
किसी प्याले से पुछा है सुराही मैं सबब में का
जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये के होश कितना है

क़लम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा,
गिरेबां अपना आँसू में भिगोता हूँ तो हंगामा,
नहीं मुझ पर भी जो खुद की ख़बर वो है ज़माने पर,
मैं हँसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा…!!

स्वंय से दूर हो तुम भी स्वंय से दूर है हम भी
बहुत मशहूर हो तुम भी बहुत मशहूर है हम भी
बड़े मगरूर हो तुम भी बड़े मगरूर है हम भी
अतः मजबूर हो तुम भी अतः मजबूर है हम भी


Download Dr. Kumar Vishwas Shayari In Hindi


हिम्मत ए रौशनी बढ़ जाती है,
हम चिरागों की इन हवाओं से,
कोई तो जा के बता दे उस को,
चैन बढता है बद्दुआओं से…!!

जिस्म का आखिरी मेहमान बना बैठा हूँ
एक उम्मीद का उन्वान बना बैठा हूँ
वो कहाँ है ये हवाओं को भी मालूम है मगर
एक बस में हूँ जो अनजान बना बैठा हूँ



कोई मंजिल नहीं जंचती, सफर अच्छा नहीं लगता,
अगर घर लौट भी आऊ तो घर अच्छा नहीं लगता,
करूं कुछ भी मैं अब दुनिया को सब अच्छा ही लगता है,
मुझे कुछ भी तुम्हारे बिन मगर अच्छा नहीं लगता..!!

कितनी दुनिया है मुझे ज़िन्दगी देने वाली
और एक ख्वाब है तेरा की जो मर जाता है
खुद को तरतीब से जोड़ूँ तो कहा से जोड़ूँ
मेरी मिट्टी में जो तू है की बिखर जाता है

पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार क्या करना,
जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना,
मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है,
हो ग़र मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना..!!

नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है
मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है
कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों
सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है।


Kumar Vishwas Shayari In Hindi And English


हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है,
और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है,
मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल,
भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है..!!



ना पाने की खुशी है कुछ,ना खोने का ही कुछ गम है…
ये दौलत और शौहरत सिर्फ कुछ जख्मों का मरहम है…
अजब सी कशमकश है रोज जीने ,रोज मरने में…
मुक्कमल जिंदगी तो है,मगर पूरी से कुछ कम है…”

चंद चेहरे लगेंगे अपने से ,
खुद को पर बेक़रार मत करना ,
आख़िरश दिल्लगी लगी दिल पर?
हम न कहते थे प्यार मत करना…!!


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